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Sunday, 15 April 2012

यूपीटीईटी-बहुत कठिन है डगर पनघट की- मनोज कुमार सिंह 'मयंक'


भ्रष्टाचार का आरोप मढ़कर हम अपनी असफलता छुपा सकते हैं और सच का गला भी घोंट सकते हैं,विशेषकर जब यह बात उत्तर प्रदेश और उत्तर प्रदेश में शिक्षा की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में कही जा रही हो तब हमें इस कथन की सत्यता जांचने के लिए अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ेगा|पूरे प्रदेश में इस बात को जोर शोर से प्रचारित और प्रसारित किया जा रहा है की उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा नवम्बर में आयोजित परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली हुई और अब इस आधार पर इस परीक्षा को रद्द कर देना चाहिए|मजे की बात तो यह है की परीक्षा में प्राथमिक स्तर पर लगभग २ लाख ७० हजार अभ्यर्थी उत्तीर्ण घोषित किये गए|क्या इसका यह अर्थ है की प्राथमिक स्तर पर परीक्षा में उत्तीर्ण समस्त २ लाख ७० हजार अभ्यर्थी बेईमान हैं?फिलहाल कथित टीईटी घोटाले के आरोप में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद निदेशक श्री संजय मोहन समेत माध्यमिक शिक्षा परिषद के कुछ अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी हिरासत में हैं,उन पर गैंगेस्टर लग चुका है और मामले की तफ्तीश चल रही है|

हमें यह नहीं भूलना चाहिए की उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री माननीय श्री अखिलेश यादव अपनी चुनावी सभाओं में मुख्यमंत्री बनने से पहले ही टीईटी निरस्त करने की सार्वजनिक घोषणा कर चुके हैं और इस घोषणा को आधार मानकर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी तथा मीडिया का एक विशिष्ट वर्ग उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी को स्पष्ट बहुमत पाता देखकर मतगणना की शाम से ही टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के विरुद्ध अनर्गल प्रलाप करने लगा|टीईटी के आधार पर नियुक्ति की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिसकर्मियों द्वारा बर्बरतापूर्ण लाठियां भी बरसाई गई|यही नहीं, विधानसभा के बाहर क्रमिक अनशन पर बैठे आंदोलनरत अभ्यर्थियों की व्यथा को किसी ने भी संज्ञान में लेने की आवश्यकता नहीं समझी और वर्तमान शासन ने भी टीईटी को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है|टीईटी को लेकर असमंजस और उससे उपजे अवसाद के चलते संत कबीर नगर के अंगद चौरसिया और बुलंद शहर के महेंद्र सिंह की मृत्यु हो चुकी है|इससे पहले भी एक टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी की माँ नकारात्मक समाचार सुनकर स्वर्ग सिधार चुकी है|इन सब ख़बरों को लेकर हमारा युवा हतोत्साहित है और आक्रोशित भी|
हमें समस्या के मूल में जाना होगा|जनता को यह जानने का हक है की उसके खून पसीने की कमाई कहाँ जाती है और नौनिहालों की शिक्षा पर होने वाले व्यय की क्या सार्थकता है? हमारे देश को आजाद हुए ६४ वर्ष से अधिक हो गए हैं,हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने पराधीन भारत में स्वतंत्र भारत का जो स्वप्न देखा था,हम उसके आस पास भी नहीं हैं|अपने अधिकारों और कर्तव्यों की कौन कहे,इन ६४ सालों में हम आज तक समग्र साक्षरता के मह्त्वाकांक्षी लक्ष्य को भी हासिल नहीं कर पाए हैं|हालांकि,इतने सालों में हमने अच्छी उपलब्धि हासिल की है और आज साक्षरता के क्षेत्र में हम ब्रिटिश राज के १२ प्रतिशत के आकडें को पार करते हुए २०११ के आंकड़ों के अनुसार ७५.०४ प्रतिशत तक पहुँच गए हैं किन्तु तुलनात्मक दृष्टि से हम आज भी विश्व साक्षरता के औसत (८४ प्रतिशत) से भी लगभग १० अंक निचले पायदान पर स्थित हैं|बात यही पर खत्म नहीं होती है,यदि हम नेपाल,बंगलादेश और पाकिस्तान जैसे संसाधनविहीन देशों को छोड़ दे तो हमारे अन्य पडोसी मसलन चीन,म्यामार,यहाँ तक की श्रीलंका जैसे छोटे देश भी साक्षरता के क्षेत्र में ९० प्रतिशत से ऊपर पहुँच चुके है|ध्यातव्य है की साक्षरता के ये आंकड़े ७ वर्ष से ऊपर आयु वर्ग की जनसँख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं|
हम योजना दर योजना मूल्य आधारित,गुणवत्तापरक और सामूहिक शिक्षा की बात करते तो हैं किन्तु जब इन्हें अमली जामा पहनाने का वक्त आता है तो हम बजट की कमी का रोना रोने लगते हैं|राज्य, केन्द्र पर दोषारोपण करता है और केन्द्र सरकार राज्यों को दोषी ठहराने लगती है|वर्तमान में भारत शिक्षा पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का मात्र ४.१ फीसदी व्यय कर रहा है जो आगे बढ़ कर लगभग ६ फीसदी होने का अनुमान है|सर्व शिक्षा अभियान केन्द्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जो शत प्रतिशत साक्षरता और शत प्रतिशत स्कूली शिक्षा के ध्येय को समर्पित है|सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत केन्द्र, राज्यों के प्राथमिक शिक्षा पर होने वाले समस्त व्यय का ६५ प्रतिशत स्वयं वहन करती है और शेष ३५ प्रतिशत व्यय राज्य सरकार वहन करती है|विशिष्ट बी टी सी से पूर्व प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा का सारा दारोमदार बी टी सी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों पर ही निर्भर था किन्तु योग्य अध्यापकों की अनुपलब्धता के चलते बी. एड. उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को भी प्राथमिक शिक्षा के लिए अर्ह मानते हुए १९९८ से विशिष्ट बी टी सी की व्यवस्था अपनाई गयी|नयी व्यवस्था होने के कारण इसका विरोध हुआ किन्तु तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की दृढता के चलते किसी की भी एक न चली और राज्य में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए|२००१ में विशिष्ट बी टी सी के आवेदन तो निकाले गए किन्तु तकनिकी बाधाओं के चलते नियुक्तियां नहीं हो पायी|२००४ और २००८ में पुनः विशिष्ट बीटीसी के माध्यम से राज्य में प्राथमिक शिक्षकों का चयन किया गया|
चूंकि इस प्रक्रिया में चयन का आधार मात्र अकादमिक उपलब्धियां थी अतः अनेक मेधावी छात्र जिनकी अकादमिक उपलब्धि संतोषजनक थी,अध्यापक बनने की प्रक्रिया से बाहर हो गए|दूसरी ओर,ऐसे अभ्यर्थी जिनके पास तकनिकी अथवा जुगाडू डिग्रियां थी, प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापक नियुक्त कर लिए गए|शिक्षा के क्षेत्र में फर्जीवाडा कोई नई बात नहीं है|किसी दूसरे के स्थान पर परीक्षा दे देना,डिग्रियों में हेर फेर,प्रश्न पत्र आउट करवा देना यहाँ तक की संसाधनों के नितांत अभाव के बावजूद उच्च शिक्षण संस्थान संचालित करने की मान्यता प्राप्त कर लेना सब कुछ चलता है|जनता यह जानना चाहती है की उत्तर प्रदेश में नक़ल माफियाओं और शिक्षा माफियाओं की जड़े कितनी गहरी है और हाल ही में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान प्रश्न पत्र लीक होने की घटनाओं को कितनी गंभीरता से लिया गया और उस पर अब तक क्या क्या कार्यवाहियां हुई हैं?अभी हाल ही में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर बिंदा प्रसाद मिश्र ने अपनी हत्या की साजिश रचे जाने की आशंका व्यक्त की है|कारण स्पष्ट है, कुलपति महोदय शिक्षा माफियाओं के राह में रोड़ा बने हुए है और प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त अध्यापकों के अंकपत्रों तथा प्रमाण पत्रों के सत्यापन में अपना सहयोग दे रहे हैं|
इन्हीं सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए और फर्जीवाड़े पर लगाम लगा कर योग्यता के वास्तविक पहचान के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने अध्यापक पात्रता परीक्षा आयोजित करने का निश्चय किया|उत्तर प्रदेश में आयोजित टीईटी की परीक्षा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के मानकों के अनुरूप ही हुई थी और इस परीक्षा में पारदर्शिता तथा शुचिता बनाये रखे जाने का पूर्ण प्रबंध किया गया था|खेद का विषय है की राज्य सरकार द्वारा मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति टीईटी के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति के बिंदु तलाशने के स्थान पर इस प्रक्रिया को निरस्त किये जाने के बिंदु तलाशने में अपनी ऊर्जा अधिक व्यय कर रही है|सोचने की बात तो यह है की ९० मिनट की सार्वभौमिक(टीईटी अभ्यर्थियों के लिए) समय सीमा के अंदर जो अभ्यर्थी ९० अंक (सामान्य वर्ग के लिए) भी नहीं ला सका, वह प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त होने का किस तरह का नैतिक आधार रखता है? और उसे प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त ही क्यों किया जाय जबकि वह निर्धारित समय सीमा के अंदर कक्षा ८ स्तर तक के प्रश्नों का भी समुचित उत्तर नहीं दे सका?अब यदि यह मान भी लिया जाय की माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में जो भी अंक बढ़ाये गए, उनमे धांधली हुई है तो इसका दोषी वह प्रतिभाशाली युवक कैसे है, जिसने स्वयं के बल परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त किये और इस आधार पर वह प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त होने का नैतिक आधार रखता है?आप नियुक्ति के पश्चात भी जांच करवा सकते हैं और आपका यह अधिकार संवैधानिक भी है किन्तु यदि संजय मोहन को आधार बनाकर इस प्रक्रिया को निरस्त किया जाता है तो हमें यह कहना होगा उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार का पौधा एक दरख्त बन चुका है क्योंकि मात्र राजनैतिक विद्वेष के चलते एक अच्छी व्यवस्था को लागू होने से पहले ही खत्म कर दिया गया|प्रधान,शिक्षा मित्र और बीएसए गठजोड़ हमारे प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा को पहले ही निगल चुका है|

Saturday, 14 April 2012

विभिन्न मित्रो से प्राप्त व्यक्तिगत सहयोग राशि

नीचे इमेज को क्लिक करे 

श्री अशोक खरे को रिट संख्या 76039 में सेवा देने के लिए प्रदत्त राशि की रसीद

कृपया निचे इमेज को किल्क करे.आप इसे सेव एज के द्वारा डाउन लोड करके जूम भी कर सकते है.

UP: मिलेंगे शिक्षा के बेहतर अवसर, सख्त होगा कानून

लखनऊ [शाश्वत तिवारी] शिक्षा के अधिकार कानून के तहत सर्वोच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों को भी 25 प्रतिशत सीटे गरीब बच्चों के लिए रिजर्व करने के आदेश दिए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे कड़ाई से लागू करने का फैसला किया है। गरीब बच्चों को एडमिशन न देने वाले स्कूलों की मान्यता भी समाप्त की जा सकती है। समाजवादी पार्टी दुहरी शिक्षा व्यवस्था की खिलाफत करती रही हैं। सर्वशिक्षा अभियान के तहत बेघर और बेसहारा बच्चों के लिए 70 आवासीय स्कूल खोले जाने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने चुनाव घोषणा पत्र के वायदों की पूर्ति की दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिये है। उन्होंने कक्षा 10 पास मुस्लिम छात्राओं को आगे पढ़ाई के लिए 30 हजार रूपए देने का एलान किया है। मदरसों में तकनीकी शिक्षा देने की व्यवस्था होगी। बारहवीं पास सभी विद्यार्थियों को लैपटाप और कक्षा 10 उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को टेबलेट देने की दिशा में भी कार्यवाही शुरू हो गई है। मुस्लिम छात्र-छात्राओं को दिये जाने वाले लैपटाप और टैबलेट में उर्दू साफ्टवेयर भी होगा।
http://teznews.com/home/news/6897

Thursday, 12 April 2012

विभिन्न जिलो से प्राप्त सहयोग राशि

यह है श्री अशोक खरे वरिष्ठ अधिवक्ता की सेवाए माननीय सिंगल बेंच में रिट संख्या ७६०३९ में लेने के लिए विभिन्न जिलो से प्राप्त सहयोग राशि. यह लडाई हम सबकी है और यह केवल साफ़ नीयत से जीती जा सकती है. हमारा प्रयास पूर्ण पारदर्शिता के साथ लड़ाई को लड़ना है.सभी जिला अध्यक्षों से निवेदन है की वह मासिक आधार पर अपने जिले के बैठको में  प्राप्त चंदे का हिसाब सभी सदस्यों को बताये.सभी सदस्यों से निवेदन है की प्राप्त चंदे का हिसाब अपने अध्यक्ष महोदय से जरुर पूछे.कृपया निचे इमेज को क्लिक करे

अब अगली मीटिंग 18 को

कृपया नीचे इमेज पर क्लिक करे 

आज से शिक्षा हर बच्चे का मूल अधिकार

नई दिल्ली।। सुप्रीम कोर्ट ने राइट टु एजुकेशन (शिक्षा का अधिकार) को संवैधानिक रूप से वैध माना है। कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद अल्पसंख्यक स्कूलों को छोड़कर देश के हर स्कूल पर राइट टु एजुकेशन (आरटीई) आज से ही लागू हो गया है। चीफ जस्टिस एसएच कपाड़िया, जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस स्वतंत्र कुमार की बेंच ने बहुमत से सुनाए फैसले में कहा कि यह कानून सरकार से वित्तीय सहायता नहीं ले रहे अल्पसंख्यक स्कूलों पर लागू नहीं होगा। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए सभी सरकारी स्कूलों, वित्तीय सहायता प्राप्त और गैर-वित्तीय सहायता प्राइवेट स्कूलों में 25% रिजर्वेशन होगा।


सरकार ने इस कानून को 2009 में ही लागू कर दिया था, लेकिन प्राइवेट स्कूलों ने इसके खिलाफ याचिका दायर करके कहा था कि यह धारा 19 (1) के तहत कानून निजी शिक्षण संस्थानों के अधिकारों का उल्लंघन करता है। उनका तर्क था कि धारा 19 (1) निजी संस्थानों को बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप के अपना प्रबंधन करने की स्वायत्तता देता है। केंद्र सरकार ने इसके खिलाफ दलील दी कि यह कानून सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की उन्नति में सहायक है।


आइए देखें कि इस ऐतिहासिक कानून से आखिर हासिल क्या होने जा रहा है-
-देश के हर 6 से 14 साल की उम्र के बच्चे को मुफ्त शिक्षा हासिल होगी यानी हर बच्चा पहली से आठवीं कक्षा तक मुफ्त और अनिवार्य रूप से पढ़ेगा।


-सभी बच्चों को घर के आस-पास स्कूल में दाखिला हासिल करने का हक होगा।


-सभी तरह के स्कूल चाहे वे सरकारी हों, अर्द्धसरकारी हों, सरकारी सहायता प्राप्त हों, गैर सरकारी हों, केंद्रीय विद्यालय हों, नवोदय विद्यालय हों, सैनिक स्कूल हों, इस कानून के दायरे में आएंगे।


-गैर सरकारी स्कूलों को भी 25 फीसदी सीटें गरीब वर्ग के बच्चों को मुफ्त मुहैया करानी होंगी। जो ऐसा नहीं करेगा उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।


-सभी स्कूल शिक्षित-प्रशिक्षित अध्यापकों को ही भर्ती करेंगे और अध्यापक-छात्र अनुपात 1:40 रहेगा।


-सभी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं होनी अनिवार्य हैं। इसमें क्लास रूम, टॉइलेट, खेल का मैदान, पीने का पानी, लंच, लाइब्रेरी आदि शामिल हैं।


-स्कूल न तो प्रवेश के लिए कैपिटेशन फीस ले सकते हैं और न ही किसी तरह का डोनेशन। अगर इस तरह का कोई मामला प्रकाश में आया तो स्कूल पर 25,000 से 50,000 रुपये तक का जुर्माना वसूला जाएगा।


-निजी ट्यूशन पर पूरी तरह से रोक होगी और किसी बच्चे को शारीरिक सजा नहीं दी जा सकेगी।
(नवभारत टाइम्स से साभार) 

जागिये साहब कब तक सोयेंगे

Thursday, April 12, 2012 संतकबीरनगर। बखिरा क्षेत्र के रक्सा कोल गांव में टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी की रविवार को हार्टअटैक से मौत हो गई। परिजन और दोस्त टीईटी चयन प्रक्रिया रुकने के कारण हार्ट अटैक होने की बात कर रहे हैं। रक्सा कोल गांव निवासी स्व. बनहा चौरसियां के तीन बेटों में अंगद चौरसिया सबसे छोटा था। मां-बाप की मौत हो चुकी है। तीनों भाइयों का परिवार अलग-अलग रहता है। मेहनत मजदूरी कर पत्नी और तीन मासूम बच्चों का खर्च उठाने के साथ अंगद ने पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया। एमए और बीएड की डिग्री हासिल की। शिक्षक बनने के लिए टीईटी की परीक्षा 109 अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण की। मझले भाई दीपचंद्र ने बताया कि टीईटी की भर्ती पर रोक लग जाने के कारण अंगद उदास रह रहा था। लखनऊ धरने में भी गया था। रविवार को गेहूं की मड़ाई हो रही थी। खेत में हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। मृतक की पत्नी रीता का रोकर बुरा हाल था। अब बेटा लवकुश, बेटी सोनी (7) और कंचन (5) अनाथ हो गई। परिजनों का कहना था कि अंगद ने पढ़ाई के लिए बैंक से कुछ कर्ज भी लिया था, जिसे जमा नहीं कर पाया था।। मौत की खबर पर बुधवार को टीईटी उत्तीर्ण जनपदस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मृतक के घर पहुंचा। अभिषेक श्रीवास्तव, देवेंद्र राय, सतीश विश्वकर्मा, बृजेश शर्मा, धर्मेंद्र पाल, रामधनी शर्मा, दिलीप यादव ने कहा कि अंगद की मौत का कारण परिजन भी टीईटी भर्ती पर रोक लग जाने से चिंतित होने की वजह से हार्ट अटैक होने से बता रहे हैं। शासन- प्रशासन की लापरवाही से मासूम बच्चे अनाथ हो गए। प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने संयुक्त रूप से मृतक की पत्नी को 1000 रुपये की आर्थिक मदद दी।
मित्रो अब तो जगे. 
आप सब से निवेदन है की टी.ई.टी. संघर्ष मोर्चा की जिला स्तरीय 

बैठक या ब्लाक स्तरीय  बैठक में जरूर  उपस्थित रहे.घर पर हम चुप 

बैठे तो आज नहीं तो कल हमारा भी यही हाल होने वाला है.

Tuesday, 10 April 2012

यादव कपिल देव लाल बहादुर बनाम उ.प्र. सरकार रिट संख्या 76039 अब 13 अप्रैल को 123 नंबर सुनवाई के लिए लगी है .


123.       76039/2011 YADAV KAPILDEV LAL BAHADUR      ALOK KUMAR YADAV         
                                                       RAJESH YADAV
                       Vs. STATE OF U.P. & OTHERS      C.S.C.                   
                                                       K.S. KUSHWAHA
 WITH WRIA- 76355/2011 SARASWATI SRIVASTAVA            SAROJ YADAV              
                       Vs. THE STATE OF U.P. AND OTHE  C.S.C.                   
                       -RS                             C.N.TRIPATHI
                                                       R.A.AKHTAR
 WITH WRIA- 76392/2011 SHIVANI                         ABHISHEK SRIVASTAVA      
                       Vs. THE STATE OF U.P. AND OTHE  C.S.C.                   
                       -RS                             RAJEEV JOSHI
                                                       C.N.TRIPATHI
 WITH WRIA- 76595/2011 SABA ANJUM & OTHERS             INDRASEN SINGH TOMAR     
                                                       AMIT KUMAR SRIVASTAVA
                       Vs. STATE OF U.P. & ANOTHER     C.S.C.                   
                                                       K.S. KUSHWAHA
 WITH WRIA- 1442/2012  VASUDEV CHAURASIA & OTHERS      RAVINDRA PRAKASH SRIV.   
                       Vs. STATE OF U.P. & OTHERS      C.S.C.                   
                                                       AKHILESH KUMAR
                                                       R.A. AKHTAR
 WITH WRIA- 75392/2011 VIJAY KUMAR TRIPATHI & ANOTHER  AJOY KUMAR BANERJEE      
                       Vs. STATE OF U.P. & OTHERS      C.S.C.                   
                                                       K.A. USMANI
 WITH WRIA- 2614/2012  MAHESH CHANDRA                  BHUPENDRA PAL SINGH      
                       Vs. STATE OF U.P. & OTHERS      C.S.C.                   
                                                       S.S. BHADAURIYA
 WITH WRIA- 2608/2012  MOHD. SADAB                     SYED IRFAN ALI           
                                                       MOHD. NAUSHAD
                       Vs. STATE OF U.P. & OTHERS      C.S.C.                   
                                                       ILLEGIBLE
 WITH WRIA- 6826/2012  VIMLESH KUMAR                   ALOK KUMAR YADAV         
                       Vs. STATE OF U.P. & OTHERS      C.S.C.                   
                                                       R.S. PRASAD
                                                       R.A. AKTAR

Friday, 6 April 2012

रिट संख्या २८०(स्पेशल अपील) का आर्डर


eLegalix - Allahabad High Court Judgment Information System (Judgment/Order in Text Format)

This is an UNCERTIFIED copy for information/reference. For authentic copy please refer to certified copy only. In case of any mistake, please bring it to the notice of Deputy Registrar(Copying).
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD 

Case :- SPECIAL APPEAL DEFECTIVE No. - 280 of 2012

Petitioner :- Lalit Mohan Singh And Anr.
Respondent :- State Of U.P. And Others
Petitioner Counsel :- Siddharth Khare,Ashok Khare
Respondent Counsel :- C.S.C.,Illigible,K.S. Kushwaha

Hon'ble Yatindra Singh,J.
Hon'ble B. Amit Sthalekar,J.

1. An advertisement for selection of Apprentice Teachers was published on 30.11.2011 in the primary school run by UP Basic Education Board (the Board). The Apprentice teachers are to be engaged in all districts and this advertisement was on behalf of all District Basic Education Officers of the State of UP.

2. WP No. 76039 of 2011 has been filed challenging the advertisement. The single Judge has passed an order on 4.1.2012 staying the selection and appointment in pursuance of the advertisement. Hence the present appeal by the two appellants, who claim themselves to be the applicants in the advertisement alongwith application to grant leave to file appeal.

3. Considering the facts that the appellants are also applicants in the selection of Apprentice Teachers, the leave is granted. The respondents have no objection to condone the delay in filing the appeal. The delay is condoned and it is heard for admission.

4. The counsel for the appellant submits that:
By the advertisement, 72825 posts have been advertised. This writ petition is on behalf of only one person and it is not proper to grant interim order in this case;
The selection process ought not to have been stayed by the single Judge but the single Judge should have permitted the selection process to go on and the selection might have been made subject to decision in the writ petition;
The reason for grant of stay order was that advertisement was on behalf of District Basic Education Officers of the State. This is not erroneous because the District Basic Education Officers are the appointing authority and one advertisement can always be issued on their behalf together;
The publication of one advertisement is practical and better way of selecting candidates in the entire district.
5. The counsel for the petitioner-respondent states that:
Apart from this writ petition there were other writ petitions that should have been connected with this one;
There is no interim order in those cases, but it is not correct to say that only one person is challenging the selection.

6. It is not disputed between the parties that counter and rejoinder affidavits have been exchanged in the writ petition and the writ petition itself is listed before the single Judge for final disposal in the week commencing 9.4.2012. Considering the facts that the number of persons are to be employed, it would be appropriate that the single Judge might consider finally deciding the writ petition at the earliest.

7. With the aforesaid observations, the special appeal is dismissed.
Order Date :- 6.4.2012
SK Singh 



Visit http://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/StartWebSearch.do for more Judgments/Orders delivered at Allahabad High Court and Its Bench at Lucknow. दिस्क्लैमेर
यह रिट तकनीकी आधार पर खारिज की गयी है.माननीय  न्यायमूर्ति द्वय  ने  माना है कि एकल बेंच को शीघ्र निर्णय दे देना चाहिए.एक चीज़ यहाँ ध्यातव्य है कि वीक कोमेंसिंग ०९ -०४-२०१२ का अर्थ है की ०९ तारीख से शुरू हो रहे सप्ताह में किसी भी दिन ७६०३९ par आर्डर आएगा न कि ०९ तारीख को केस लिस्ट होगा.

माननीय डबल बेंच का रिट संख्या ७६०३९ को खारिज करने का निर्देश

माननीय cj कोर्ट ने आज स्पेशल  अपील  संख्या २८० ललित मोहन सिंह बनाम राज्य सरकार  पर सुनवाई करते हुए . यादव कपिलदेव  लाल बहादुर की रिट संख्या ७६०३९ को सोमवार को एकल बेंच को खारिज करने का निर्देश दे दिया है.

Wednesday, 4 April 2012

माननीय उच्च न्यायालय में स्पेशल अपील आवेदित

हमारी टीम ने माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में ललित मोहन सिंह और रणजीत सिंह यादव के नाम से स्पेशल अपील का आवेदन किया है.इस में हमारे अधिवक्ता श्री अशोक खरे जी है .इस अपील में हमने रिट संख्या ७६०३९ यादव कपिल देव लाल बहादुर  बनाम राज्य सरकार में लगे स्टे को अविलम्ब हटाने और नियुक्ति प्रक्रिया को मूल विज्ञापन के आधार पर अविलम्ब करने की प्रार्थना की है.