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Monday, 14 May 2012

लोक तंत्र का चौथा स्तम्भ या अंधे अंधा ठेलिया दोनों कूप पडंत

कमर खुजाला नामक समाचार पत्र अक्सर टी ई.टी परीक्षा निरस्त करवाया करता है,जैसे एक बानगी देखे 

    UPTET :  टीईटी घोटाला - जेडी और डीआईओएस दफ्तर में जांच

एंटीकरप्शन टीम ने लिया अफसरों की भूमिका का ब्यौरा

कानपुर। टीईटी घोटाले की जांच कर रही पुलिस की एंटीकरप्शन शाखा की दो सदस्यीय टीम ने शुक्रवार को संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) और डीआईओएस कार्यालय में छानबीन की। लखनऊ से टीम के आने से कार्यालय में हड़कंप मचा रहा। जेडी और डीआईओएस के कार्यालय में न होने पर टीम ने विभाग के बाबुओं से परीक्षा प्रक्रिया की पड़ताल की। वहीं, डीआईओएस द्वितीय से भी परीक्षा में उनकी भूमिका के बारे में पूछा।
इंस्पेक्टर आरके सिंह के नेतृत्व में एंटीकरप्शन की टीम शुक्रवार दोपहर चुन्नीगंज स्थित जेडी कार्यालय पहुंची। जेडी माया निरंजन के कार्यालय में न मिलने पर विभाग के बाबुओं से प्रश्न पत्रों की गोपनीयता, प्रश्न पत्र रखने के स्थान, परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र पहुंचाने और ओएमआर शीट को सील बंद करने की प्रक्रिया के बारे में पूछा। इसके बाद टीम डीआईओएस कार्यालय पहुंची। डीआईओएस शिवसेवक सिंह के न होने पर टीम ने डीआईओएस द्वितीय विभा शुक्ला से परीक्षा केंद्र निर्धारण में उनकी भूमिका और परीक्षा के दौरान केंद्रों का दौरा करने के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि परीक्षा केंद्र निर्धारण में उनकी कोई भूमिका नहीं थी जबकि पांच केंद्रों का निरीक्षण उन्होंने किया था


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अब जरा टी ई टी के मार्गदर्शी  जी.ओ. (इसे आप  http://www.scertup.org/TET_RELATED_GOVT_ORDERS.pdf  पर डाउनलोड कर सकते है।  )में लिखे शब्दों पर गौर करे -
पेज संख्या

परीक्षा का आयोजन - 10 मद संख्या 12
"शिक्षक पात्रता परीक्षा -उत्तर प्रदेश "  मंडल मुख्यालय के जिलाधिकारी की अध्यक्षता एवं देख-रेख में   
मंडलीय मुख्यालयों पर आयोजित कराई जायेगी. जनपद स्तर पर परीक्षा संचालन हेतु समीति पूर्णतः सक्षमं एवं उत्तरदायी होगी. इस हेतु परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण निम्नलिखित समिति द्वारा किया जायेगा 
(क) जिलाधिकारी                                                                                                   अध्यक्ष 
(ख) मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक                                                                        सदस्य  सचिव 
(ग)जिला विद्यालय निरीक्षक(मंडलीय मुख्यालय )                                               सदस्य
(घ ) प्राचार्य डायट (मंडलीय मुख्यालय )                                                                सदस्य
(च )   मंडलीय सहायक  शिक्षा निदेशक बेसिक                                                      सदस्य

अब जरा मेरे द्वारा निकाले गए निष्कर्षो पर ध्यान दे  

1. जैसाकि  बार बार  कमर खुजाला द्वारा लिखा जाता है की 800 लोगो लिए शिक्षा विभाग के एक उच्च अधिकारी द्वारा अलग केंद्र बनवाया गया था .आज तक ना ही उस केंद्र ,शहर और उस अधिकारी का नाम उजागर किया गया है। क्या पांच सदस्यीय समित्ति जिसका प्रमुख मंडल का जिलाधिकारी 
है ,से एक केंद्र अपने मनमाफिक बनवाया जा सकता है? इसी जी ओ. के पेज 13 पर मद 18 देखे जिसमे लिखा है कि  यह एक संवेदनशील परीक्षा है।यदि मान ले  कि  एक मनमाफिक केंद्र बन भी गया तो क्या एल्फाबेटिक  क्रम  आवंटित अनुक्रमाकों को वहा  किस प्रकार भेजा गया .आप किसी भी मंडल का कोई भी नाम www.uptet2011.com  पर चेक  करे आपको अनुक्रमांक  एक  एल्फाबेटिक क्रम में मिलेंगे।
2.जब मेरे जैसा साधारण व्यक्ति इस जी ओ. को scert  की वेब साईट  से प्राप्त कर सकता है तो सर्व सामर्थ्यवान  विजिलेंस विभाग को ये जी ओ. लेने के लिए जे डी  कार्यालय के बाबुओ से  क्यों बात करनी पडी।
3. जैसाकि  बार बार कमर खुजाला लिखता है कि  फॉर्म बिक्री घोटाला .संजय मोहन ने पंजाब नेशनल  बैंक में एक खाता  खुलवाया गया. अब जरा इसी जी ओ. के पेज संख्या 7 के मद संख्या 5(2) को पढ़े "परीक्षा हेतु राष्ट्रिय कृत बैंक में अलग से एक खाते का संचालन किया जायेगा। ये  खाता पद नाम से खोला गया है ना की संजय मोहन के व्यक्तिगत नाम से।
4. ऊपर समाचार में आपने पढ़ा होगा की OMR शीट शील बंदी प्रक्रिया ,प्रश्न पत्र रखने का स्थान आदि के बारे में बाबुओ से पूछ ताछ किया गया।इसके लिए कृपया जी ओ. के पेज 11 का मद 14 और 15 को  देखे।इसमें साफ़ साफ़ लिखा है की जिलधिकारी प्रश्न पत्रों को दोहरे ताले मे कोषागार  में सुरक्षित  रखवायेंगे।और OMR को भली भांति  शील्ड करा के जिलाधिकारी निर्दिष्ट स्थान पर भेजेंगे।
5. रही बात OMR पर सफ़ेद फ्लूड  लगाने की बात तो OMR  में साफ़ साफ़ लिखा था यदि कोई अभ्यर्थी एक से ज्यादा उत्तर देता है दो उसे अंक नहीं दिए जायेंगे. यदि ऐसा OMR  जांचने वाली संस्था ने फ्लूड  लगे OMR  पर अंक दिए है तो ऐसे लोग आसानी से चिन्हित किये जा सकते है।क्योकि OMR  की एक प्रति राज्य सरकार के पास सुरक्षित है।एक बात और राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी के अध्यक्ष  संजय मोहन नहीं थे .इसके अध्यक्ष सचिव बेसिक शिक्षा थे (देखे जी ओ. का पेज 13 मद 18) थे।ये कमेटी TET  की शुचिता बनाये रखने की जिम्मेदार है।
अब एक बात  निश्चित तौर पर कही जा सकती है कि  क्यों  दैनिक जागरण ने अपने सहारनपुर के 04 मई के अंक में निम्न  लेख क्यों लिखा 

परीक्षा का आधार बदलना टेढ़ी खीर

सहारनपुर : टीइटी से प्राथमिक स्कूलों में नियुक्ति का आधार बदलने या उसे रद करने की कोशिश सरकार को भारी पड़ेगी। बसपा सरकार ने टीइटी के पात्रता परीक्षा के आधार को बदलकर मेरिट की श्रेणी में शामिल किया था। अब सपा सरकार परीक्षा के आधार को दोबारा पात्रता परीक्षा करने की कसरत में जुटी है। पूरे मामले में कानूनी राय अहम होगी और इसे नजरअंदाज करना सरकार के गले की फांस बन सकता है। इन दिनों टीइटी से प्राथमिक शिक्षकों की भर्त्ती पर परीक्षा में उत्तीर्ण रहे 2.70 लाख अभ्यर्थियों की निगाहें लगी हैं। स्कूलों में नियुक्ति मिलेगी या फिर कानूनी जंग लड़नी होगी? मामले को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ज्ञापन भेजने व विभिन्न जिलों में धरना-प्रदर्शन का क्रम जारी है। प्रदेश सरकार भी टीइटी को लेकर खासी चुस्त नजर आ रही है। मामले में पहले गठित बेसिक शिक्षा विभाग की एक कमेटी ने टीइटी को रद करने की सिफारिश की थी। बाद में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा टीइटी को रद्द न करने की बात कही थी। कमेटी ने मेरिट के आधार को बदलकर टीइटी को केवल पात्रता परीक्षा बनाने पर सहमति दी है। हालांकि इस बारे में अभी कोई अंतिम निर्णय नही हुआ है। जाल का नहीं कोई तोड़बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों का दावा है कि टीइटी परीक्षा की गाइडलाइन का कोई तोड़ नहीं है। उनका दावा है कि बसपा सरकार ने टीइटी को पात्रता की श्रेणी से हटाकर मेरिट के आधार में बदलने का जो निर्णय लिया था वह मंत्रिमंडल का सामूहिक निर्णय था। उनका तर्क है कि एक मामले में पूर्व में हुआ निर्णय इसमें भी मील का पत्थर साबित हो सकता है। इसके मुताबिक परीक्षा से एक दिन पूर्व तक ही सरकार परीक्षा/नियुक्ति को बनाए नियमों में बदलाव कर सकती है। बाद में किसी भी प्रकार का बदलाव नियुक्ति के आधार के संबंध में नहीं किया जा सकता। टीइटी प्रक्रिया में कानूनी जंग से बचने के लिए प्रदेश सरकार के लिए कानूनी राय अहम होगी। 



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