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Wednesday, 12 September 2012

आप्प दीपो भव


आज कोर्ट की कार्यवाही के उपरान्त मुझे भगवान बुद्ध की ये पंक्तियाँ आज मुझे बारम्बार याद आ रही हैं, अपने आप को स्वयं प्रकाशित करो . कृपया मुझे कुछ सवालों के जवाब दे 
क्या आपकी जगह टी.ई.टी. परीक्षा किसी और ने दी थी?
क्या आपके आवेदन  पत्रों  को  भेजने  और ड्राफ्ट  का खर्च किसी और ने उठाया था.
क्या आपकी मियुक्ति के बाद आपकी जगह कोई और वेतन पाता?
उत्तर होगा नहीं. 
जब आप परीक्षा ,आवेदन  करना आदि सभी कार्यो में खुद सक्रिय थे तब आज आप किसी दूसरे से उम्मीद क्यों पाल के बैठे है वो आपको  घर बैठे मुकदमा जीता  देंगे.
आज इसी अनुकरण वादी प्रवृत्ति का नतीजा है कि हमारा पक्ष मजबूत होते हुए भी हम हार के कगार पर खड़े है, अब मै झूठी आत्ममुग्धता नहीं पालूंगा .
इस मसले का शुरू से केवल और केवल एक ही हल था कोर्ट द्वारा मामले का समाधान, चाहे अंततः सर्वोच्च  न्यायालय क्यों नहीं जाना पड़ता .जब स्थगन आदेश आया था तभी से हमारी सभी चाले आत्मघाती साबित हुई.जैसे मुख्यमंत्री जी की गणेश  परिक्रमा करना ,फल क्या हुआ उस मुलाकात का .12 जुलाई के आन्दोलन में सभी के नजरो में गिर जाना ,हमारे नेता जिस सरकार से हमें टी ई टी मेरिट की याचना करनी थी उसे ही टीवी पर टेस्ट ट्यूब बेबी सरकार बताते रहे.हमें टी ई टी मेरिट मिली चाहे ना मिली उनकी राजनैतिक महत्वकांक्षाए जरूर संतुष्ट होती रही ,जैसे मेरे ही जिले के टी .ई.संघर्ष मोर्चा के स्वयंभू  प्रदेश संरक्षक ,जो मोर्चे की हर मीटिंग में धन तो उगाहते है ,पर आज तक हिसाब नहीं दिया .
अब बात करे वकीलों के मोर्चे पर असफलता की .हमारे एक वकील महोदय पुलिस भर्ती में वर्तमान सत्ताशीन पार्टी की सरकार द्वारा नियुक्त  लोगो को न्याय दिलवा चुके है,प्रारंभ से ही वह ऐन मौके पर   प्रायः कोर्ट से गायब हो जाते है ,शरू में वह एकेडेमिक मेरिट की ओर से एक केस हार चुके है.उसके बाद भी उन्हें वकील रखा गया?
हमारे दूसरे वकील साहब की (जो मोटी फीस लेने के बाद एक बार भी कोर्ट नहीं आये ) की सपा सुप्रीमो से बहुत बढ़िया मित्रता है.
हमारे तीसरे और नवनियुक्त वकील साहब शशि नंदन जी  के भाई सपा की ओर से २००२ में विधान सभा प्रत्याशी थे .
मित्रो ऐसे लोगो से हम कैसे उम्मीद कर सकते है वो सरकार को नाखुश करके हमें हमारा वाजिब हक दिलाएंगे.
आज तक मै संगठन की एकता के नाम पर चुप था,पर आज लग रहा है की ये संगठन कुछ लोगो के व्यक्तिगत महत्वकांक्षा का मंच मात्र था ,कोर्ट केस देख रहे लोगो में  एक से एक अहमवादी है जिन्होंने मात्र अपने अहम की संतुष्टि के लिए गलत फैसले लिए(जैसे शिव कुमार पाठक )  और नतीजा सामने है. ये तो हुआ इतिहास अब आगे क्या?
क्या हमारी उम्मीदे समाप्त हो गयी हैं ?
इसका उत्तर है नहीं .मित्रो हमें न्याय केवल और केवल सर्वोच्च न्यायलय से मिलेगा( मै किसी आत्ममुग्धता का शिकार नहीं रहना चाहता हु) ,अगर हम हाई कोर्ट से जीते तो सरकार हमें वहा ले के जायेगी ,और अगर हम यहाँ हारे ता हम स्वतः ही जायेंगे.
अगर ये भर्ती हाई कोर्ट अपने पर्यवेक्षण में नया विज्ञापन निकलवा के करा देता है तो सुप्रीम कोर्ट से भी केवल उन्ही लोगो को न्याय मिलेगा जिनके नाम रिट में शामिल होंगे.
मित्रो हम देवरिया जिले के 8 लोग नयी रिट करने की योजना बना रहे है इसमें अन्य जिलो के भी भाई शमिल है. सुप्रीम कोर्ट में भी हाई कोर्ट के सिगल बेंच में डाली गयी रिट के कागजो पर बहस होती है अतः हमें सिंगल बेंच में ऐसा वकील करना है जो हमरे रिट की मजबूत ड्राफ्टिंग कर सके और जो professional हो .ऐसे ही एक वकील लखनऊ बेंच के प्रशांत चंद्रा जी है जिनकी फीस 100000 रुपये है अतः  हमें आवश्यकता है ऐसे  tet merit के सिपाहियों की जो हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम  कोर्ट तक 15000 से 20000 रुपये खर्च कर सके और बुलाने पर कम से कम २ बार लखनऊ और २ बार दिल्ली आ सके .प्रशांत चंद्रा जी ऐसे वकील है जिन्हें बहस करने के लिए खोजना नहीं पड़ता है केस के समय वो खुद ही पहुच जाते है..याद रखे हमारे साथ जुड़ने कि निम्नलिखित शर्ते है -
१.यहाँ पर सभी कार्यकर्ता होंगे कोई नेता नहीं होगा.हमें केवल इंजिनों  की जरुरत है डिब्बो की नहीं.
२. अपना अहम सभी अपने घर छोड़कर आयेंगे.
३.अपने हिस्से का पैसा लोग खुद ही वकील को अपने हाथों  से देंगे. 
४.किसी के अकाउंट में एक पैसा नहीं लिया जायेगा ना ही किसी व्यक्ति को नगद दिया जायेगा.
५.पैसा देने वाले प्रत्येक व्क्यति का नाम रिट में शामिल होगा इसके लिए उसे खुद आकर वकालतनामा साइन करना होगा. अतः मित्र से पैसे नहीं भेजे,खुद आये.
कृपया हमसे http://www.facebook.com/groups/332271576860205/ पर  जुड़े  या 8004360279 पर प्रातः 11 बजे से  काल  करे.इसके लिए एक मीटिंग लखनऊ में 22 सितम्बर को रखी गयी है उसी दिन ही रिट भी  ड्राफ्ट होगी ताकि 24 सितम्बर को नयी रिट दाखिल की जा सके.






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