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Wednesday, 15 August 2012

RPSC: RAS के नए पैटर्न को मिली मंजूरी,अब होंगे केवल पांच पेपर

 अजमेर.राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा संयुक्त (आरएएस) प्रतियोगी परीक्षा में अब केवल 5 ही पेपर होंगे। स्केलिंग भी अब खत्म हो गई है कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्यपाल ने भी नए प्रारूप को हरी झंडी दे दी है। ये नियम 2013 की परीक्षा से लागू होंगे। राजभवन से जारी अधिसूचना मंगलवार को आरपीएससी को प्राप्त हो गई है। इसके मुताबिक इन नियमों का नाम राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा सीधी भर्ती द्वारा) रहेगा। यह प्रारंभिक (प्री) और मुख्य (मेन) परीक्षा के स्वरूप में ही होगी। अब तक इनमें जो 78 प्रश्न पत्र होते थे, वे अब 5 ही रह गए हैं।सामान्य अध्ययन व सामान्य विज्ञान के 2 पेपरों की जगह 3 पेपर होंगे। प्री-परीक्षा अब इसमें दो के बजाय एक ही पेपर लिया जाएगा जो सामान्य ज्ञान एवं सामान्य विज्ञान का होगा। 200 अंकों के प्रश्न-पत्र के लिए3 घंटे का समय मिलेगा। यह वस्तुनिष्ठ परीक्षा केवल स्क्रीनिंग के लिए होगी। पहले प्री-परीक्षा में 37 वैकल्पिक विषयों
 के पेपर भी होते थे।

ऐसी होगी मुख्य परीक्षा मुख्य परीक्षा में केवल 4 पेपर होंगे जो अनिवार्य होंगे। ये डिस्क्रिप्टिव टाइप (वर्णनात्मक) के होंगे। इनमें संक्षिप्त, मध्यम व दीर्घ उत्तर वाले प्रश्न भी होंगे। सामान्य हिंदी व सामान्य अंग्रेजी सीनियर सैकंडरी स्तर की होगी। समय तीन घंटे का होगा। पहले के पैटर्न में कुल 78 पेपर होते थे जो चयनात्मक थे। ये होंगे प्रश्न पत्र प्रश्न पत्र व निर्धारित अंक सामान्य अध्ययन प्रथम: 200 सामान्य अध्ययन द्वितीय: 200 सामान्य अध्ययन तृतीय: 200 सामान्य हिंदी और सामान्य अंग्रेजी: 200 अधिसूचना मिली, 2013 से लागू होगी
-आरएएस परीक्षा पर जारी अधिसूचना आयोग को मिल गई है। नए नियम 2013 से लागू होंगे। 2012 की परीक्षा पुराने पैटर्न पर ही होगी। डॉ. के के पाठक, सचिव, राजस्थान लोक सेवा आयोग काफी अध्ययन हुआ था नए प्रारूप के लिए आरपीएससी ने आरएएस परीक्षा के पैटर्न में बदलाव के लिए देश के कई आयोगों की परीक्षा प्रणाली का अध्ययन किया। फिर विशेषज्ञ समिति गठित की। आयोग की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री व कैबिनेट ने हरी झंडी दी। अब राज्यपाल की भी मंजूरी मिल गई है।

Thursday, 9 August 2012

नियमावली को अंतिम रूप दिया गया

आज के हिन्दुस्तान के लखनऊ संस्करण में समाचार  है की नियमावली को अंतिम रूप दिया गया .इसकी फोटो आप क्लिक करके देख सकते है .

Wednesday, 8 August 2012

रिट संख्या 76039 के 06-08-2011 आर्डर का हिंदी अनुवाद -

माननीय अरुण टंडन ,न्यायमूर्ति 
उत्तर प्रदेश राज्य  की ओर से एक शपथ पत्र  सचिव बेसिक शिक्षा,उ.प्र.सरकार ,लखनऊ  के द्वारा प्रस्तुत किया गया. शपथ पत्र के साथ कैबिनेट के निर्णय की प्रति जो की निदेशक बेसिक शिक्षा को मुख्य सचिव की ओर से २१-०७-२०१२ को सूचित की गयी है ,दस्तावेज के रूप में लाई गयी.
श्री सी,बी.यादव, विद्वान् अतिरिक्त महाधिवक्ता ,ने न्यायालय को सूचित किया कि कैबिनेट के निर्णय के अनुकूल नियमो में आवश्यक संशोधन किया जाना अभी बाकी है.श्री अशोक खरे ,विद्वान् वरिष्ठ अधिवक्ता ,ने यह बिंदु उठाया कि एक याचिका कैबिनेट निर्णय के तहत २१ जुलाई -२०१२ को  नोटिफाई किये गए आदेशो के विरूद्ध पहले से ही आवेदित की जा चुकी है. 
राज्य को   २५-०८-२०१२ तक परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापको की नियुक्ति  को विनियमित करने  वाले सांविधिक नियमो में अपनी  इच्छा अनुसार आवश्यक संशोधन करना  चाहिए.
इस प्रकार के दिशा निर्देश इस न्यायालय द्वारा मात्र इसलिए जारी किये जा रहे है क्योकि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षको के भर्ती पिछले कई वर्षों से रुकी हुई है, प्रारंभिक तौर पर इस लिए की उचित विज्ञापन नहीं निकाला गया और बाद में राज्य द्वारा आयोजित की गयी अध्यापक पात्रता परीक्षा के सम्बन्ध में गंभीर विवाद प्रश्नगत हुए.
यह न्यायालय इस मुद्दे का भी अवश्य निपटारा करेगी  ताकि परिषदीय विद्यालयों  को उपयुक्त शिक्षक मिल सके, जहाँ पात्र  शिक्षको की भारी कमी है .
यह न्यायालय यहाँ यह भी स्पष्ट करना चाहती है कि इस कोर्ट द्वारा राज्य सरकार के कैबिनेट निर्णय के सम्बन्ध में कोई मत व्यक्त नहीं किया गया है. 
यह राज्य के लिए है कि वह संशोधन करने के पूर्व मामले के सभी पहलुओ की परीक्षा  करे और सब कुछ जो आवश्यक हो निश्चित रूप से अगली तिथि से पहले करे.राज्य सरकार्र द्वारा दाखिल शपथ पत्र में २५-०५-२०१२ के आदेश में पूछी गयी जानकारी के उत्तर अवश्य होने चाहिए.
इस मामले को २७-०८-२०१२ को सूचीबद्ध करे.इस कोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेश अगली निर्धारित सूचीबद्ध तिथि तक परिचालन में रहेगा.

(माननीय अरुण टंडन, न्यायमूर्ति )  

अनुवाद साभार प्रियरंजन वर्मा 


यूपी बोर्ड से छिन सकता है टीईटी कराने का दायित्व

लखनऊ। यूपी में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2012 के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। राज्य सरकार इस बार यूपी बोर्ड से टीईटी कराने का दायित्व लेकर किसी दूसरी संस्था को देने पर विचार सकती है। शासन में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) से मिले प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बुधवार को बैठक बुलाई गई है। प्रमुख सचिव सुनील कुमार की अध्यक्षता में होने वाली बैठक के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी को प्रस्ताव भेजा जाएगा, जो अंतिम निर्णय लेंगे।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद बेसिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। यूपी में वर्ष 2011 में टीईटी आयोजित कराई गई थी। उस समय परीक्षा कराने की जिम्मेदारी माध्यमिक शिक्षा परिषद को दी गई। परीक्षा के बाद अंक संशोधन के दौरान हुई गड़बड़ी के आरोप में तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा निदेशक संजय मोहन को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, इतने विवादों के बाद भी टीईटी निरस्त नहीं की गई है। टीईटी का आयोजन प्रत्येक वर्ष जुलाई में किया जाना चाहिए, लेकिन इस बार देर होने की वजह से नवंबर 2012 में इसके आयोजन की तैयारी है। इससे पहले टीईटी कराने के लिए संस्था के चयन पर अंतिम निर्णय किया जाना है। इसलिए शासन स्तर पर बुधवार को बैठक बुलाई गई है।
•एससीईआरटी से मिले प्रस्ताव पर चर्चाआज


•साभार -अमर उजाला 

Monday, 6 August 2012

तृतीय श्रेणी शिक्षकों की नियुक्ति से रोक हटी



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जयपुर। हाईकोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा में 60 प्रतिशत से कम अंक वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में सामान्य वर्ग में नियुक्ति देने पर रोक हटा ली है। साथ ही, कहा कि नियुक्ति कोर्ट के आदेश से प्रभावित रहेगी, जिसका नियुक्ति पत्र में उल्लेख भी किया जाए।
न्यायाधीश मनीष भण्डारी ने पे्ररणा जोशी की याचिका पर सोमवार को यह अंतरिम आदेश दिया। प्रार्थीपक्ष ने कहा कि आरक्षित वर्ग वालों को शिक्षक पात्रता परीक्षा में 60 प्रतिशत से कम अंक पर उत्तीर्ण मान लिया है, इनमें से कुछ शिक्षक भर्ती में सामान्य वर्ग की मेरिट में आ रहे हैं। शिक्षक पात्रता परीक्षा में कम अंक पर उत्तीर्ण होने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में उन्हीं की श्रेणी में नियुक्ति दी जाए।
राज्य सरकार के अतिरिक्त महाघिवक्ता एसएन कुमावत ने कहा कि इस याचिका के आधार पर पिछले दिनों कोर्ट द्वारा नियुक्ति पर लगाई रोक को हटाया जाए, शिक्षक पात्रता परीक्षा स्वतंत्र परीक्षा है। उसमें प्रमाण पत्र के लिए आरक्षित वर्ग को छूट दी है, जो हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने भी जायज मानी है।
इधर, तृतीय श्रेणी शिक्षक सीधी भर्ती परीक्षा है, इस परीक्षा में शिक्षक पात्रता परीक्षा के 20 प्रतिशत अंक जोडे जाएंगे। ऎसे में शिक्षक भर्ती परीक्षा में ज्यादा अंक के कारण वह सामान्य वर्ग में नियुक्ति का पात्र होता है, उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। ऎसे अभ्यर्थियों की संख्या भी ज्यादा नहीं होगी,  ऎसे में नियुक्ति प्रक्रिया को नहीं रोका जाए। कोर्ट ने नियुक्ति की छूट देते हुए कहा कि राज्य सरकार नियुक्ति तो दे सकती है, लेकिन नियुक्ति पत्र में अंतिम निर्णय कोर्ट के फैसले के तहत होने का उल्लेख किया जाए। 
साभार राजस्थान पत्रिका 

Sunday, 5 August 2012

विशिष्ट बीटीसी वालों को करना होगा अभी इंतजार



लखनऊ। बीटीसी और विशिष्ट बीटीसी करने के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने वालों को शिक्षक बनने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। राज्य सरकार इन्हें नियुक्ति देने से पहले उत्तर प्रदेश अध्यापक सेवा नियमावली में संशोधन करेगी। इसके लिए बेसिक शिक्षा निदेशालय से प्रस्ताव मांग लिया गया है।
यूपी में पहले बीटीसी और विशिष्ट बीटीसी की ट्रेनिंग करने वालों को प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक की सीधे नियुक्ति दी जाती रही है। पर यूपी में 27 जुलाई 2011 को शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद बीटीसी और विशिष्ट बीटीसी की ट्रेनिंग करने वालों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले वर्ष 2004 के शेष बचे बीटीसी वालों व वर्ष 2007-08 के विशिष्ट बीटीसी करने वालों पर भी इसकी अनिवार्यता लागू हो गई। ऐसे अभ्यर्थियों ने टीईटी तो उत्तीर्ण कर ली है लेकिन उन्हें नियमावली बदलने के बाद ही सहायक अध्यापक बनाया जा सकेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि चूंकि पूर्ववर्ती सरकार ने शिक्षक बनने के लिए टीईटी की मेरिट को अनिवार्य किया था, लेकिन अब शैक्षिक मेरिट को अनिवार्य किया गया है। इसलिए नियमावली में संशोधन हुए बिना बीटीसी और विशिष्ट बीटीसी वालों को शिक्षक नहीं बनाया जा सकता है।
•नियमावली संशोधन होने के बाद ही बन सकेंगे शिक्षक

Saturday, 4 August 2012

स्कूलों की मनमानी पर लगेगी रोक




नई दिल्ली दाखिले के लिए मोटी फीस, डोनेशन, कैपिटेशन, शैक्षिक सत्र के बीच में ही फीस बढ़ा देना या फिर अपनी कोई शर्त मनमाने के लिए छात्रों-अभिभावकों को मजबूर करना। आने वाले समय में निजी स्कूलों के लिए यह सब आसान नहीं होगा। स्कूलों में हर तरह के गलत क्रियाकलापों को रोकने के लिए केंद्र सरकार कानून बनाने की तैयारी में है। कानून तोड़ने वालों को जुर्माना और सजा भुगतनी होगी। मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डी पुरंदेश्वरी की अगुवाई वाली केंद्रीय शिक्षा सलाहकार परिषद (केब) की उप समिति ने कानून का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति गठित कर दी है। राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन विश्वविद्यालय (न्यूपा) के कुलपति प्रो. आर गोविंदा की अध्यक्षता में बनी इस मसौदा समिति की दो बैठकें भी हो चुकी हैं। उम्मीद है कि उसमें स्कूलों की सारी मनमानियों को रोकने वाले विधेयक का मसौदा तय हो जाएगा। सूत्रों के मुताबिक इस कानून के बनाने के पीछे सरकार का मकसद स्कूलों में न सिर्फ छात्रों, बल्कि अभिभावकों और शिक्षकों तक का शोषण रोकना है। कानून बना तो कोई भी स्कूल ज्यादा फीस नहीं वसूल सकेगा। किसी एक निश्चित दुकान से किताब-कापी और यूनीफार्म खरीदने की शर्त नहीं लगा सकेगा। दाखिले से इन्कार नहीं कर सकेगा। अपने स्कूल, शिक्षकों की योग्यता या फिर पाठ्यक्रम के बारे में गलत जानकारी नहीं दे सकेगा। शिक्षकों को कम वेतन देकर उनसे ज्यादा भुगतान पर दस्तखत नहीं करा सकेगा। ऐसी भी शिकायतें आती हैं, जब स्कूल बीच सत्र में ही फीस बढ़ा देते हैं। या फिर कोई बहाना लेकर छात्र को टीसी देकर स्कूल से निकाल देते हैं। जबकि, जब छात्र खुद स्कूल छोड़ना चाहता है तो टीसी नहीं देते। सरकार प्रस्तावित कानून को लागू करने में सफल हुई तो यह सब नहीं होगा। सरकार की पूरी कोशिश सख्त कानून बनाने की है, जिसमें स्कूलों के गलत क्रियाकलापों के दोषी पाए जाने वालों को सजा व जुर्माना भुगतान पड़ेगा।
(साभार -दैनिक जागरण )