माननीय अरुण टंडन ,न्यायमूर्ति
उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से एक शपथ पत्र सचिव बेसिक शिक्षा,उ.प्र.सरकार ,लखनऊ के द्वारा प्रस्तुत किया गया. शपथ पत्र के साथ कैबिनेट के निर्णय की प्रति जो की निदेशक बेसिक शिक्षा को मुख्य सचिव की ओर से २१-०७-२०१२ को सूचित की गयी है ,दस्तावेज के रूप में लाई गयी.
श्री सी,बी.यादव, विद्वान् अतिरिक्त महाधिवक्ता ,ने न्यायालय को सूचित किया कि कैबिनेट के निर्णय के अनुकूल नियमो में आवश्यक संशोधन किया जाना अभी बाकी है.श्री अशोक खरे ,विद्वान् वरिष्ठ अधिवक्ता ,ने यह बिंदु उठाया कि एक याचिका कैबिनेट निर्णय के तहत २१ जुलाई -२०१२ को नोटिफाई किये गए आदेशो के विरूद्ध पहले से ही आवेदित की जा चुकी है.
राज्य को २५-०८-२०१२ तक परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापको की नियुक्ति को विनियमित करने वाले सांविधिक नियमो में अपनी इच्छा अनुसार आवश्यक संशोधन करना चाहिए.
इस प्रकार के दिशा निर्देश इस न्यायालय द्वारा मात्र इसलिए जारी किये जा रहे है क्योकि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षको के भर्ती पिछले कई वर्षों से रुकी हुई है, प्रारंभिक तौर पर इस लिए की उचित विज्ञापन नहीं निकाला गया और बाद में राज्य द्वारा आयोजित की गयी अध्यापक पात्रता परीक्षा के सम्बन्ध में गंभीर विवाद प्रश्नगत हुए.
यह राज्य के लिए है कि वह संशोधन करने के पूर्व मामले के सभी पहलुओ की परीक्षा करे और सब कुछ जो आवश्यक हो निश्चित रूप से अगली तिथि से पहले करे.राज्य सरकार्र द्वारा दाखिल शपथ पत्र में २५-०५-२०१२ के आदेश में पूछी गयी जानकारी के उत्तर अवश्य होने चाहिए.
(माननीय अरुण टंडन, न्यायमूर्ति )
अनुवाद साभार प्रियरंजन वर्मा
उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से एक शपथ पत्र सचिव बेसिक शिक्षा,उ.प्र.सरकार ,लखनऊ के द्वारा प्रस्तुत किया गया. शपथ पत्र के साथ कैबिनेट के निर्णय की प्रति जो की निदेशक बेसिक शिक्षा को मुख्य सचिव की ओर से २१-०७-२०१२ को सूचित की गयी है ,दस्तावेज के रूप में लाई गयी.
श्री सी,बी.यादव, विद्वान् अतिरिक्त महाधिवक्ता ,ने न्यायालय को सूचित किया कि कैबिनेट के निर्णय के अनुकूल नियमो में आवश्यक संशोधन किया जाना अभी बाकी है.श्री अशोक खरे ,विद्वान् वरिष्ठ अधिवक्ता ,ने यह बिंदु उठाया कि एक याचिका कैबिनेट निर्णय के तहत २१ जुलाई -२०१२ को नोटिफाई किये गए आदेशो के विरूद्ध पहले से ही आवेदित की जा चुकी है.
राज्य को २५-०८-२०१२ तक परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापको की नियुक्ति को विनियमित करने वाले सांविधिक नियमो में अपनी इच्छा अनुसार आवश्यक संशोधन करना चाहिए.
इस प्रकार के दिशा निर्देश इस न्यायालय द्वारा मात्र इसलिए जारी किये जा रहे है क्योकि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षको के भर्ती पिछले कई वर्षों से रुकी हुई है, प्रारंभिक तौर पर इस लिए की उचित विज्ञापन नहीं निकाला गया और बाद में राज्य द्वारा आयोजित की गयी अध्यापक पात्रता परीक्षा के सम्बन्ध में गंभीर विवाद प्रश्नगत हुए.
यह न्यायालय इस मुद्दे का भी अवश्य निपटारा करेगी ताकि परिषदीय विद्यालयों को उपयुक्त शिक्षक मिल सके, जहाँ पात्र शिक्षको की भारी कमी है .
यह न्यायालय यहाँ यह भी स्पष्ट करना चाहती है कि इस कोर्ट द्वारा राज्य सरकार के कैबिनेट निर्णय के सम्बन्ध में कोई मत व्यक्त नहीं किया गया है. यह राज्य के लिए है कि वह संशोधन करने के पूर्व मामले के सभी पहलुओ की परीक्षा करे और सब कुछ जो आवश्यक हो निश्चित रूप से अगली तिथि से पहले करे.राज्य सरकार्र द्वारा दाखिल शपथ पत्र में २५-०५-२०१२ के आदेश में पूछी गयी जानकारी के उत्तर अवश्य होने चाहिए.
इस मामले को २७-०८-२०१२ को सूचीबद्ध करे.इस कोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेश अगली निर्धारित सूचीबद्ध तिथि तक परिचालन में रहेगा.
अनुवाद साभार प्रियरंजन वर्मा
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